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पृथ्‍वी के परिमण्‍डल - स्थलमंडल - जल मण्‍डल - वायुमण्‍डल - जैवमंडल

पृथ्‍वी के परिमण्‍डल - स्थलमंडल - जल मण्‍डल - वायुमण्‍डल - जैवमंडल

पृथ्‍वी के परिमण्‍डल

  • पृथ्‍वी पर कितने परिमण्‍डल है ?
  • विभिन्‍न परिमण्‍डलों की विशेषताएँ क्‍या है व उनकी आपसी निर्भरता किस प्रकार है ?
पृथ्‍वी, सौरमण्‍डल का प्रमुख ग्रह है जिस पर जीवन है ! इसीलिए इसे अनोखा ग्रह कहते हैं ! पृथ्‍वी पर भूमि, जल और वायु पाये जाने से यहाँ जीवन का विकास संभव हुआ ! पृथ्‍वी के भूमि वाले भाग को स्‍थल मण्‍डल , जल वाले भाग को जलमण्‍डल और वायु के आवरण को वायुमंडल कहते हैं ! पृथ्‍वी का वह क्षेत्र जहां उपरोक्‍त तीनों परिमण्‍डल एक-दूसरे से मिलते हैं जैवमण्‍डल कहलाता है !


पृथ्‍वी के 29 प्रतिशत भाग में भूमि (थल) है तथा 71 प्रतिशत भाग में जल पाया जाता है अर्थात इस प्रकार पृथ्‍वी पर जल भूमि से लगभग तीन गुना से भी अधिक है ! पृथ्‍वी का केवल एक तिहाई भाग स्‍थल है तथा दो तिहाई हिस्‍सा जल से ढका है ! स्‍थल विशाल भूखंडों में विभाजित है जिन्‍हें महाद्वीप कहते हैं ! इन विशाल महाद्वीपों को खारे जल का विस्‍तार घेरे हैं जिन्‍हें महासागर कहते हैं !


पृथ्‍वी के परिमण्‍डल - स्थलमंडल - जल मण्‍डल - वायुमण्‍डल - जैवमंडल



आइए सभी परिमंडलों के बारे में जाने:-

(1) स्थलमंडल

स्‍थलमंडल में पृथ्‍वी की ऊपर सतह के वे सभी छोटे-बड़े भूखंड सम्मिलित है जो कठोर और नरम शैलों (चट्टानों) से बने हैं ! छोटे भूखंड जिनके चारों और जल हो 'द्वीप' कहलाता है तथा जैसे ऊपर बताया विशाल भूखंडों को महाद्वीप कहते है ! आप महाद्वीपों के नाम जान चुके हो !
पृथ्‍वी का सम्‍पूर्ण धरातल एक समान नहीं है ! इसके कुछ भाग समतल है तो कुछ भाग उबड़-खाबड़ एवं ऊँचे-नीचे हैं ! ऊँचाई तथा आकार के अनुसार स्‍थल भाग की इन्‍हीं आकृतियों को पर्वत, पठार, मैदान के नाम से जाना जाता है ! यह आकृतियाँ सभी महाद्वीपों में पायी जाती है ! चूँकि समुद्र की ऊपरी सतह सब जगह समान है इसलिए स्‍थल पर ऊचाईयाँ समुद्र की सतह से नापी जाती है !

''पृथ्‍वी का वह समस्‍त भू-भाग जो कठोर और नरम शैलों से बना है, स्‍थलमंडल कहलाता है !''

पर्वत- अपने आस पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचे भाग होते हैं और इनके ढाल तीव्र होते हैं ! पहाडों में ऊँची-ऊँची चोटियाँ और गहरी खाइयाँ होती है ! पर्वतों के समूह को पर्वत श्रेणियां कहते हैं ! ये पर्वत श्रेणियां हजारों किलोमीटर में फैली हैं !



भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत श्रेणी फैली हुई है ! यह संसार की सबसे ऊँची पर्वत श्रेणी है ! मध्‍यप्रदेश में विंध्‍याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रेणियां है !

पठार- सामान्‍य रूप से ऊँचे उठे हुए वे भू-भाग हैं जिनकी ऊपरी सतह लगभग समतल अथवा हल्‍की ऊँची-नीची होती है, पठार कहलाते हैं ! यह आसपास के क्षेत्रों से एक दम उठे हुए होते हैं ! पठार के इन तेज ढलान वाले किनारे को कगार कहते हैं ! हमारे देश में दक्‍कन का पठार प्रसिद्ध है !

मैदान- हमारी पृथ्‍वी के वे निचले भाग जो समतल और सपाट हैं मैदान कहलाते हैं ! अधिकतर मैदान नदियों द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी, कंकड़, बालू पत्‍थर आदि से बने हैं ! हमारे देश में गंगा-यमुना से बना उत्तर का विशाल मैदान प्रमुख हैं !
चीन में ह्वांगहो व यांगटीसीक्‍यांग नदियों से बना मैदान और उत्तरी अमेरिका के मिसीसिपी-सिसौरी नदियों से बने मैदान बड़े उपलाऊ है ! यही कारण है कि इन मैदानों में बड़ी संख्‍या में लोग बसते हैं !

(2) जल मण्‍डल

पृथ्‍वी का वह समस्‍त भाग जो जल से ढका है जलमंडल कहलाता है !
हम सौभाग्‍यशाली है क्‍योंकि पृथ्‍वी पर विशाल जन भंडार है ! जैसा कि आप जानते हो कि पृथ्‍वी के दो तिहाई भाग पर जल है ! यह जल, महासागर, सागर, झीलों और नदियों आदि में एकत्र है ! ये सब मिलकर जलमण्‍डल का निर्माण करते हैं ! आप महासागरों के नाम जान चुके हैं ! प्रशान्‍त महासागर सबसे बड़ा और गहरा महासागर है ! जलमण्‍डल से हमें वर्षा तथा हिम मिलता है जो हमारे तरह-तरह के उपयोग में आता है ! यह मीठा जल है ! जबकि सागरों का जल खारा होता है !


(3) वायुमण्‍डल

आप जानते हो कि हमारे चारों ओर वायु का आवरण है ! यह आवरण धरातल से लगभग 1600 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला है ! वायुमंडल में वायु धरातल के निकट अधिक मात्रा में तथा ऊँचाई बढ़ने पर धीरे-धीरे कम होती जाती है ! इस कारण पहाड़ों पर सांस लेने में कठिनाई होती है ! पर्वतारोही अपने साथ ऑक्‍सीजन गैस के सिलेण्‍डर ले जाते हैं ! इस प्रकार वायुमंडल पृथ्‍वी के लिए एक कंबल का कार्य करता है और हमें सूर्य की तेज किरणों से बचाता है ! वायुमंडल में अनेक गैसें जैसे ऑक्‍सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन-डाईआक्‍साईड आदि पाई जाती है !

पृथ्‍वी के चारों ओर वायु का आवरण जो विभिन्‍न गैसों के मिश्रण से बना है वायुमंडल कहलाता है !

वायुमंडल में नाइट्रोजन गैस सबसे अधिक मात्रा में अर्थात 78.1 प्रतिशत पाई जाती हैं ! आक्‍सीजन गैस सभी जीवधारियो के जीवन के विकास के लिए प्राणवायु के रूप में कार्य करती है ! यह वायुमंडल में 21 प्रतिशत पाई जाती है ! इसी प्रकार कार्बन डाईआक्‍साइड पेड़-पौधों की वृद्धि में सहायक है !
वायुमण्‍डल में गैसों की मात्रा-
गैस मात्रा प्रतिशत
नाइट्रोजन 78.1
आक्‍सीजन 20.9
आरगर 0.93
कार्बन-डाईआक्‍साइड 0.03
जलवाष्‍प तथा अन्‍य गैसें 0.02

(4) जैवमंडल

पृथ्‍वी के तीनों परिमंडल स्‍थलमंडल, वायुमंडल और जलमंडल मिलकर एक प्रकार का वातावरण तैयार करते हैं जिसे प्राकृतिक वातावरण या पर्यावरण कह सकते हैं ! इसी प्राकृतिक पर्यावरण में पृथ्‍वी के समस्‍त जीवजन्‍तु एवं पेड़ पौधे जीवित रहते हैं ! जैवमंडल के जीवों को दो श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं-
(1) प्राणी जगत 
(2) वनस्‍पति जगत


जीवों का वह मंडल जो स्‍थल, जल और वायुमंडल में पाया जाता है, जैवमंडल कहलाता है !


प्राणी जगत में जीवों की लगभग दस लाख जातियां पायी जाती है ! इसमें अति सूक्ष्‍म जीवाणु से लेकर विशालकाय हाथी एवं व्‍हेल मछली तक सम्मिलित है ! प्राणी जगत में जीव जन्‍तु एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान को भ्रमण करते हैं ! वनस्‍पति जगत में तीन लाख जातियां पाई जाती हैं, जिनमें अति सूक्ष्‍म फफूंदी से लेकर विशालकाय पेड़ तक सम्मिलित है ! वनस्‍पति जगत के जीव एक ही स्‍थान पर विकसित होते हैं !



जैवमंडल अंग्रेजी के बायोस्‍फीयर शब्‍द से बना है ! बायो का अर्थ जीवन है, इसलिए इसे जैवमंडल या जीवन क्षेत्र कहते हैं ! यहाँ भूमि, वायु और जल एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं ! पृथ्‍वी का सम्‍पूर्ण जीवन इसी क्षेत्र में सीमित है ! यह समु‍द्र तल से केवल कुछ ही किलो‍मीटर नीचे तथा ऊपर तक होता है ! इस परिमंडल में जीव-जन्‍तु , पेड़-पौधे और सूक्ष्‍म जीवाणु पाए जाते हैं ! यानी जैवमंडल में जीवों का आकार सूक्ष्‍म जीवाणु से लेकर विशालकाय हाथी तक है !
पृथ्‍वी के सभी परिमंडल एक-दूसरे पर निर्भर है इसलिए प्रत्‍येक परिमंडल एक-दूसरे को प्रभावित करता है ! मानव विभिन्‍न परिमंडलों को प्रभावित करने वाला महत्‍वपूर्ण सदस्‍य है ! जैसे बढ़ती हुई जनसंख्‍या को अधिक स्‍थान चाहिए ! वनों को साफ करके स्‍थान प्राप्‍त किया जाता है, परन्‍तु पेड़ों के काटने से प्रकृति पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ेगा इससे मृदा अपरदर बढ़ेगा, जिस आक्‍सीजन को हम पेड़ों से प्राप्त करते हैं उसमें भी कमी आएगी ! इस प्रकार प्राकृतिक पर्यावरण से जैवमंडल का गहरा संबंध है ! उनमें आपसी निर्भरता है ! इस निर्भरता को निरन्‍तर बनाए रखने की जो व्‍यवस्‍था है उसे पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं ! इस प्राकृतिक सन्‍तुलन को बनाए रखने के लिए आवश्‍यक है कि हम भी प्रकृति द्वारा दिए गए पदार्थों का मानव कल्‍याण में सदुपयोग कर उसके दूरुपयोग को रोकने का प्रयास करें !

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अक्षांश एवं देशान्‍तर रेखाएं - पृथ्‍वी अपने अक्ष पर 231/2° झुकी हुई है - अक्षांश एवं देशान्‍तर रेखाओं की विशेषताएं

अक्षांश एवं देशान्‍तर रेखाएं -  पृथ्‍वी अपने अक्ष पर 231/2° झुकी हुई है - अक्षांश एवं देशान्‍तर रेखाओं की विशेषताएं

अक्षांश एवं देशान्‍तर रेखाएं

  • अक्षांश व देशान्‍तर रेखाएं क्‍या है, व उनकी विशेषताएँ कौन-कौन सी है ?
  • अक्षांश व देशान्‍तर रेखाओं की आवश्‍यकता और उपयोगिता क्‍या है ?
  • अक्षांश व देशान्‍तर रेखाओं की सहायता से पृथ्‍वी पर किसी स्‍थान की स्थिति कैसे ज्ञान करते हैं ?



    ग्‍लोब और मानचित्र पर बहुत सी रेखाएं खिंची होती है ! कुछ रेखाएं खड़ी होती है और कुछ आड़ी ! ये रेखाएं एक-दूसरे को काटती भी है, और ग्‍लोब पर जाल सा बनाती है ! वास्‍तव में ये रेखाएं काल्‍पनिक है ! पृथ्‍वी पर ऐसी कोई रेखाएं खिचीं हुई नहीं हैं ! पृथ्‍वी पर किसी स्‍थान की ठीक-ठीक स्थिति दर्शाने के लिए ये रेखाएं ग्‍लोब एवं मानचित्र पर खींची गयी हैं ! इन रेखाओं की मदद से हम किसी गांव, नगर, देश या किसी स्‍थान की भौगोलिक स्थिति को आसानी से जान सकते हैं ! रेखाओं के इस जाल को समझने के लिए हमें ग्‍लोब पर दो बिन्‍दूओं को देखना होगा ! एक बिन्‍दू ग्‍लोब के ठीक ऊपर की ओर होता है ! जिसे हम उत्तरी ध्रुव कहते हैं और दूसरा एकदम नीचे की ओर होता है जिसे दक्षिणी ध्रुव कहते हैं ! यदि हम ग्‍लोब को ध्‍यान से देखें तो हमें इन दोनों ध्रुवों के बीचों बीच एक वृत खींचा हुआ दिखाई  देता है ! जिसे भूमध्‍य रेख या विषुवत वृत्‍त कहते हैं ! यह वृत्त पृथ्‍वी को दो बराबर भागों में बांटता है ! इस वृत्त के उत्तर वाले भाग को उत्तरी गोलार्द्ध एवं दक्षिण वाले भाग को दक्षिणी गोलाद्ध कहते हैं !

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    अक्षांश रेखाएं- भूमध्‍य रेखा के समानान्‍तर खींचे हुए वृत्तों या आड़ी रेखाओं को अक्षांश वृत्त अथवा अक्षांश रेखाएं कहते हैं ! भूमध्‍य रेखा के केंद्र बिन्‍दु से प्रत्‍येक अंश पर एक-एक वृत्त खींचे गये हैं व उनके सामने उ. एवं द. लिखा जाता है जिसका अर्थ क्रमश: उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश होता है ! इस तरह 90 अक्षांश उत्तरी गोलार्द्ध में और 90 अक्षांश दक्षिणी गोलार्द्ध में खींचे है ! इस प्रकार कुल 180 अक्षांश वृत्त या रेखाएं ग्‍लोब पर खींची गयी है ! ग्‍लोब पर खिंचे हुए सभी वृत्तों में विषुवत वृत्त या विषुवत रेखा सबसे बड़ा वृत्त है ! उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरी अक्षांश वृत को कर्क वृत या कर्क रेखा कहते है ! यह वृत हमारे देश के गुजरात, मध्‍यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा व मिजोरम आदि राज्‍यों में होकर गुजरता है ! इसी प्रकार दक्षिणी गोलार्द्ध में 231/2° दक्षिणी आक्षंश वृत्त को मकर वृत या मकर रेखा कहते है!
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      • पृथ्‍वी अपने अक्ष पर 231/2° झुकी हुई है, इस कारण पृथ्‍वी पर 231/2° उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षांश तक ही सूर्य वर्ष में एक बार सीधा चमकता है ! इस अक्षांश से उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव तथा सूर्य कभी भी सीधा चमकता है ! इस अक्षांश से उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव तथा सूर्य कभी भी सीधा नहीं चमकता ! यही कारण है कि कर्क रेखा एवं मकर रेखा का निर्धारण 231/2° पर किया गया है !
      • भूमध्‍य रेखा के समानान्‍तर खीचें हुए वृत्तों या आड़ी रेखाओं को अक्षांश वृत या रेखाएँ कहते हैं ! इनकी कुल संख्‍या 180 है !

        अक्षांश रेखाओं की विशेषताएं :-
        • ये रेखाएं पूर्व से पश्चिम दिशा में विषुवत रेखा के समानान्‍तर खींची जाती है !
        • ये पूर्ण वृत्ताकार होती है !
        • दो अक्षांशों के बीच की दूरी समान होती है !
        • विषुवत वृत्त से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर वृत्त छोटे होते जाते हैं ! ध्रुव एक बिंदु के रूप में रह जाता है !
        • अक्षांश रेखाओं की लंबाई समान नहीं होती है !
        • भूमध्‍य रेखा के उत्तरी क्षेत्र को उत्तरी गोलार्द्ध व दक्षिणी गोलार्द्ध कहते हैं !



                देशान्‍तर रेखाएं :-

                किसी भी स्‍थान की सही स्थिति का पता लगाने के लिए हमें अक्षांश वृत्तों के अलावा कुछ खड़ी रेखाओं का भी सहारा लेना पड़ता है ! ये रेखाएँ ग्‍लोब या मानचित्र पर उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव को जोड़ती हैं ! उत्तर से दक्षिण खींची रेखाओं को देशान्‍तर रेखा कहते हैं ! ग्‍लोब पर ये रेखाएं उत्तर से दक्षिण की ओर अर्ध वृत्त होती है जबकि मानचित्रों में उत्तर से दक्षिण में सीधी खींची होती है !
                देशान्‍तर रेखाएं, longitude in hindi

                मुख्‍य अक्षांश रेखा (0° भूमध्‍य रेखा) की तरह ही देशान्‍तर रेखाओं में भी एक रेखा को प्रधान देशान्‍तर रेखा माना जाता है ! यह रेखा इंग्‍लैंड में लंदन के पास स्थित ग्रीनविच वेधशाला से गुजरती है ! इसे ही 0° प्रधान मध्‍यान्‍ह रेखा कहते हैं ! अन्‍य देशान्‍तर रेखाएँ प्रधान मध्‍यान्‍ह रेखा के पूर्व और पश्चिम में खींची गई हैं ! प्रधान मध्‍यान्‍ह रेखा पृथ्‍वी को पूर्वी व पश्चिमी गोलार्द्ध में बांटती है ! प्रधान मध्‍यान्‍ह रेखा के दोनों ओर 1° के अंतराल पर खींची गई 180 देशांतर रेखाएँ हैं ! किसी भी प्रकार के भ्रम से बचने के लिए पूर्वी गोलार्द्ध और पश्र्चिमी गोलार्द्ध की देशांतर रेखाओं के साथ क्रमश: 'पू.' तथा 'प.' शब्‍द लिखा जाता है ! जिसका अर्थ क्रमश: पूर्वी तथा पश्चिमी होता है !


                देशान्‍तर रेखाओं की विशेषताएं-
                • देशान्‍तर रेखाएं अर्द्धवृत्त होती हैं !
                • इनकी लंबाई समान होती हैं !
                • विषुवत वृत्त पर इनके बीच की दूरी सबसे अधिक होती है, लेकिन जैसे-जैसे हम ध्रुवों की ओर जाते हैं तो देशान्‍तर रेखाओं के बीच की दूरी कम होती जाती हैं !
                • ये रेखाएं प्रधान मध्‍यान्‍ह रेखा के दोनों ओर 1° के अंतराल पर खींची गई हैं ! इनकी कुल संख्‍या 360 हैं !
                • पृथ्‍वी पर किसी स्‍थान की ठीक-ठीक स्थिति दर्शाने के लिए अक्षांश और देशांतर रेखएं, ग्‍लोब एवं मानचित्र पर खींची गयी है ! इनकी सहायता से हम पृथ्‍वी पर किसी भी स्‍थान की भौगोलिक स्थिति को जान सकते हैं ! ये काल्‍पनिक रेखाएं हैं !

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